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पटना रिंग रोड को मिली अंतिम मंजूरी: 21 साल पुरानी योजना अब पूरी होने के करीब, 16 हजार करोड़ से बदलेगा बिहार का नक्शा

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केंद्र सरकार ने पटना रिंग रोड के अंतिम हिस्से को मंजूरी दे दी है। 150 किमी लंबी इस परियोजना पर 16,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिससे पटना, वैशाली और सारण के विकास को नई रफ्तार मिलेगी।

पटना/आलम की खबर:पटना की बहुप्रतीक्षित रिंग रोड परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। केंद्र सरकार द्वारा इस महत्वाकांक्षी योजना के आठवें और अंतिम हिस्से को मंजूरी दिए जाने के बाद अब 21 साल पुरानी यह योजना वास्तविकता के बेहद करीब पहुंच गई है। लगभग 150 किलोमीटर लंबी इस परियोजना पर करीब 16,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं और इसके पूरा होने के बाद राजधानी पटना सहित आसपास के जिलों के विकास की तस्वीर पूरी तरह बदलने की उम्मीद है।

इस परियोजना की शुरुआत वर्ष 2005 में की गई थी, जब पहली बार पटना के चारों ओर एक आधुनिक रिंग रोड बनाने का विचार सामने आया था। समय के साथ भूमि अधिग्रहण, तकनीकी स्वीकृति और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण यह योजना लंबे समय तक धीमी गति से आगे बढ़ती रही। लेकिन अब केंद्र सरकार की अंतिम मंजूरी के बाद यह प्रोजेक्ट तेजी से पूर्णता की ओर बढ़ रहा है।

आठ चरणों में बन रहा है पूरा रिंग रोड

पटना रिंग रोड को कुल आठ अलग-अलग चरणों में तैयार किया जा रहा है। इनमें से कई हिस्सों में निर्माण कार्य पहले ही पूरा हो चुका है, जबकि शेष हिस्सों पर तेजी से काम चल रहा है। अंतिम मंजूरी मिलने के बाद अब इस परियोजना को निर्णायक गति मिलने की उम्मीद है।

इस रिंग रोड का उद्देश्य केवल सड़क निर्माण नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को नया स्वरूप देना है। यह सड़क पटना शहर के चारों ओर एक मजबूत परिवहन घेरा तैयार करेगी, जिससे शहर के भीतर ट्रैफिक दबाव काफी कम होगा।

अंतिम चरण दीघवारा से सराय तक

परियोजना का आठवां और अंतिम हिस्सा दीघवारा से सराय के बीच बनाया जाएगा, जिसकी लंबाई लगभग 30 किलोमीटर होगी। इस हिस्से पर करीब 1,500 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। यह मार्ग गंगा नदी के उत्तरी हिस्से में वैशाली और सारण जिलों को जोड़ते हुए तैयार किया जाएगा।

भूमि अधिग्रहण में आने वाली लागत का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा बिहार सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। इस हिस्से के पूरा होने के बाद उत्तर बिहार और राजधानी पटना के बीच कनेक्टिविटी और अधिक मजबूत हो जाएगी।

पटना शहर को मिलेगा ट्रैफिक से राहत

पटना शहर में लगातार बढ़ते वाहनों के कारण जाम की समस्या गंभीर होती जा रही है। रिंग रोड बनने के बाद बाहरी जिलों से आने वाले भारी वाहन शहर में प्रवेश किए बिना सीधे अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। इससे शहर के मुख्य मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और लोगों को जाम से राहत मिलेगी।

साथ ही यात्रा समय में भी काफी कमी आएगी, जिससे आम लोगों की सुविधा बढ़ेगी और परिवहन व्यवस्था अधिक सुगम बनेगी।

आर्थिक विकास को मिलेगी नई गति

विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल सड़क तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाली योजना है। रिंग रोड के किनारे औद्योगिक क्षेत्र, लॉजिस्टिक हब, वेयरहाउस और आवासीय परियोजनाओं के विकसित होने की संभावना है।

इससे हजारों नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे और पटना, वैशाली तथा सारण जिलों में निवेश की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आने से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

दिल्ली-एनसीआर मॉडल की ओर बढ़ता पटना

रिंग रोड परियोजना के पूरा होने के बाद पटना का शहरी विस्तार दिल्ली-एनसीआर मॉडल की तरह विकसित होने की उम्मीद जताई जा रही है। बेहतर सड़क संपर्क के कारण पटना और आसपास के जिलों के बीच दूरी का एहसास कम होगा और एक बड़ा शहरी नेटवर्क तैयार होगा।

यह रिंग रोड 7 राष्ट्रीय राजमार्गों और 5 प्रमुख राज्य मार्गों को आपस में जोड़ने का काम करेगी, जिससे बिहार की कनेक्टिविटी को एक नया आयाम मिलेगा।

भविष्य की बड़ी उम्मीदें

इस परियोजना के पूरा होने के बाद पटना न केवल बिहार की राजधानी के रूप में बल्कि एक बड़े विकसित शहरी केंद्र के रूप में उभर सकता है। सड़क, उद्योग और आवासीय विकास के साथ-साथ यह परियोजना क्षेत्रीय विकास का मजबूत आधार बनेगी।

फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि निर्माण कार्य कितनी तेजी से पूरा होता है और यह मेगा प्रोजेक्ट कब तक जनता को समर्पित किया जाता है।

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